Tuesday, September 6, 2011

77 देशों में लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार ही नहीं


सतेंद्र त्रिपाठी। तमाम कवायदों के बावजूद मानवाधिकारों के मामले में आज भी विश्व के अनेक देश बहुत पिछड़े हुए है। करीब 81 देशों में व्यक्तिगत रूप से लोग परेशान किए जाते है, 54 देशों में लोगों के साथ अन्याय होता है। और इससे भी बढ़कर लगभग 77 देशों में लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार ही नहीं है। वैश्विक मंच पर मानवाधिकार की इस तरह की बातों को बहुत नििर्भकता से रखा एक भारतीय पुलिस अधिकारी ने।
जी हां पिछले दिनों स्विट्जरलैंड की राजधानी जिनेवा में आयोजित कार्यक्रम आठवें विश्व अन्तराष्ट्रीय मानवाधिकार सम्मेलन 2011 के दौरान मानवाधिकार विशेषज्ञ और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एवं वर्तमान में मॉरिशस में बतौर निदेशक आईओआर एआरसी-सचिवालय मनीष कुमार अग्रवाल को बतौर अतिथि वक्ता बुलाया गया था। निश्चित रूप से यह पुलिस महकमे के लिए और भारत के लिए गर्व की बात थी। दिल्ली पुलिस के नई दिल्ली एवं उत्तर पि´ाम जिले में अपने काम का लोहा मनवा चुके श्री अग्रवाल ने जब जिनेवा में अपना भाषण दिया तो सभागार तालियों से गूंज उठा।
श्री अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि मानवाधिकार का प्रशिक्षण निजि रूप से भी दिया जाना चाहिए। यही नहीं नेतृत्व भी इस तरह के शिक्षण के बाद ही आगे बढ़े तो बेहतर है। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों के साथ करीब 60 देशों प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन में यह बताया गया कि महिलाएं और बच्चे तो किसी न किसी रूप से शोषण का शिकार होते ही है और लोग भी किसी न किसी रूप में ऐसे मामलों में संलि¹ा पाए जाते है। मानवाधिकार हनन आज भी एक महामारी के रूप में वि बताया कि डॉ॰मैरी शैटlover्थ ने स्वागत भाषण दिया। श्री वर्थ युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार के अध्यक्ष है। इसके अलावा प्रमुख वक्ताओं में अलबर्ट नौगा(संयुक्त राष्ट्र संघ), डॉ॰अवनी बेहनाम(पूर्व पदाधिकारी संयुक्त राष्ट्र संघ) के अलावा मानवाधिकार से जुड़े जानी मानी हस्तियां मौजूद थी। श्री अग्रवाल ने बताया कि लोगों ने मानवाधिकार क्षेत्र में युवा वर्ग को जोड़े जाने की जरूरत पर बल दिया है। इस मौके पर एक प्रेजेन्टेशन भी दिया गया। जिसके तहत मानवाधिकार शिक्षा एवं पुरस्कार कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में मैक्सिको को जुआनसैविनेश, इटली के ऐलोनोरा फ्रीगैरियो, अमेरिका के डस्टिन मैक्गी को मानवाधिकार हीरो पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस सम्मेलन का सहभागीदार हैती गणराज्य का परमानेंट मिशन था। सम्मेलन में मौजूद प्रमुख लोगों एवं वक्ताओं ने विश्व के उन विभिन्न देशों की चर्चा भी की, जहां से खबरें आती है कि वहां मानवाधिकार हनन के मामले सर्वाधिक होते है।

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